मंदिरों में चलते-चलते करना होंगे दर्शन, गेट पर साबुन से भक्तों को धोना होंगे हाथ-पैर

मार्च से बंद शहर के धार्मिक स्थल खोलने के आदेश प्रशासन ने सोमवार को जारी कर दिए। कोरोना से बचाव के लिए मंदिरों में पूरी व्यवस्था की गई है। भक्त अब रुककर दर्शन नहीं कर सकेंगे। चलते हुए ही दर्शन करना होंगे। खजराना गणेश मंदिर में चोला चढ़ाने के लिए रसीद भी कटवा सकेंगे।

खजराना गणेश : एक घंटे में 120 श्रद्धालु दर्शन करेंगे
खजराना गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने बताया एक घंटे में 120 श्रद्धालु दर्शन कर पाएंगे। प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर के साथ साबुन से हाथ-पैर धोने व बैरिकेडिंग की व्यवस्था रहेगी। चोला चढ़ाने के लिए रसीद कटवानी होगी, लेकिन आम दर्शकों के साथ ही चलित दर्शन करते हुए बाहर निकलना होगा। सुबह 9 से शाम 7 बजे तक मंदिर आम भक्तों के लिए खुला रहेगा।

रणजीत हनुमान : एक समय में 40 श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे, पुजारियों की भी थर्मल स्क्रीनिंग

  • अन्नपूर्णा मंदिर के विश्वेश्वरानंद महाराज ने कहा मंदिर में चलित दर्शन की व्यवस्था रहेगी। सुबह 7.30 बजे आरती होगी। नियमों का पालन करने के लिए गार्ड तैनात किए जाएंगे।
  • विद्याधाम मंदिर से जुड़े दिनेश शर्मा के मुताबिक मंगलवार से दर्शन व्यवस्था लागू होगी। 6 फीट पर गोले बनाए गए हैं। सोशल डिस्टेंसिंग व सैनिटाइजर की व्यवस्था रहेगी। भक्तों को सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रखना होगा।

तिरुपति बालाजी को रोज चार बार सैनिटाइज करेंगे

  • गीता भवन ट्रस्ट के मंत्री राम ऐरन ने बताया सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क लगाना अनिवार्य होगा। सैनिटाइजर की व्यवस्था रहेगी।
  • गुमाश्ता नगर स्थित तिरुपति बालाजी देवस्थान के ट्रस्टी पुरुषोत्तम पसारी ने बताया कि भक्तों को सैनिटाइज किया जाएगा। साबुन से हाथ धोना अनिवार्य होगा। बिना मास्क के श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। मंदिर को दिन में चार बार सैनिटाइज करेंगे।


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रणजीत हनुमान मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया सोशल डिस्टेंसिंग के लिए मंदिर परिसर में गोले बनाए हैं। एक समय में मंंदिर परिसर में 40 श्रद्धालु रहेंगे। इनके बाहर निकलने पर ही दूसरे भक्तों को प्रवेश देंगे। स्कैनिंग के बाद ही पुजारियों को प्रवेश देंगे।


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47.4 इंच बरसकर लौट चला मानसून; पिछले साल अक्टूबर तक सक्रिय था, इस बार समय पर जा रहा

(राहुल दुबे) मौसम विभाग के हिसाब से बारिश का खाता 30 सितंबर को बंद हो जाएगा। 1 जून से 30 सितंबर तक बारिश की अवधि मानी जाती है। इस दफा 47.4 इंच पानी गिरा है, जो औसत से 13.4 इंच ज्यादा है। पिछले साल 30 सितंबर की अवधि तक 53 इंच पानी गिरा था। अक्टूबर में भी जुलाई-अगस्त जैसा पानी बरसा था। मानसून की अधिकृत अवधि यानी 30 सितंबर तक बारिश नहीं होगी। दोपहर में जरूर बादल छा जाएंगे, लेकिन यह केवल धूप से राहत देंगे।

अगले साल तक कोई किल्लत नहीं
पानी देने वाले बिलावली तालाब और यशवंत सागर पूरी क्षमता से भरे हुए हैं। क्रमश: 24 और 10 फीट पानी आ गया है। इसका मतलब यह है कि अगले साल गर्मी खत्म होने तक पानी की कमी नहीं होगी। इसके बाद बारिश आने पर औसत बारिश भी हो गई तो तालाब फिर भर जाएंगे। गर्मियों में भी इन तालाबों में 10 फीट तक पानी रहता है।

अगस्त में हुई दो गुना बारिश
अगस्त की बारिश 11.5 इंच तक मानी जाती है। इस बार अगस्त में 24 इंच के करीब पानी गिरा। सौ साल में पहली बार 12.5 इंच पानी एक साथ गिरा। इसी बारिश ने सालभर का कोटा पूरा कर दिया था। जबकि जून, जुलाई और 19 अगस्त तक सूखा घोषित होने के आसार बन रहे थे।

चारों महीने मिलाकर इस बार बारिश के दिन कम रहे, लेकिन पानी ज्यादा बरसा
जून : जून में छह दिन पानी गिरता है। इस बार 1 से 3 जून तक पानी गिरा। फिर 15 जून को मानसून घोषित हुआ, लेकिन बरसा नहीं। 18, 19 को पानी गिरा। 28 जून को बारिश हुई थी।

जुलाई : जुलाई में 13 से 14 दिन पानी गिरता है, लेकिन इस वर्ष 1 से 10 जून के बीच केवल ढाई इंच पानी गिरा। फिर जुलाई के अंत में यानी 20 से 30 जुलाई के बीच 5 इंच पानी बरसा।

अगस्त : 19 अगस्त तक 19 से 20 इंच। 21, 22 अगस्त को एक ही बार में 12.5 इंच गिरा। 28 अगस्त को 3 इंच बारिश हुई। इसे मिलाकर बारिश 37 इंच तक पहुंच गई।

सितंबर : 6 सितंबर के बाद 2 से 2.5 इंच बारिश के 4 राउंड आए। आंकड़ा 47 इंच तक पहुंच गया। सितंबर में बारिश के दिन 7 से 8 होते हैं, पर इस बार 11 दिन पानी बरसा।



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बारिश की विदाई के साथ ही शीत ऋतु का अहसास कराती शाम। तस्वीर रीगल तिराहा, शाम 6 बजे।


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ब्याज व पेनल्टी का मात्र 5% भरने पर प्रकरण खत्म होगा; 57 साल पुराने केसों का भी समाधान हो सकेगा

वाणिज्यिक कर विभाग ने जीएसटी से पहले लागू वाणिज्यिक कर एक्ट, वैट व अन्य एक्ट के तहत साल 1959 से 31 मार्च 2016 तक के लंबित टैक्स डिमांड विवाद निराकरण के लिए समाधान योजना का नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कारोबारी को टैक्स डिमांड की मात्र 50 फीसदी राशि व ब्याज व पेनल्टी का पांच फीसदी राशि भरने पर केस खत्म हो जाएगा। इस योजना से प्रदेश के 30 हजार से ज्यादा कारोबारियों को राहत मिलेगी।

वरिष्ठ कर सलाहकार आरएस गोयल ने बताया यदि कारोबारी और विभाग के बीच 300 रुपए के टैक्स व इस पर 200 रुपए ब्याज व पेनल्टी मिलाकर कुल 500 रुपए का विवाद है तो कारोबारी टैक्स का 50 फीसदी यानी 150 रुपए और ब्याज-पेनल्टी का पांच फीसदी यानी दस रुपए कुल 160 रुपए भरकर पुराना केस खत्म कर सकता है। हालांकि जिनके यहां छापे पड़ने पर टैक्स डिमांड निकली, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। इस योजना के तहत व्यवसायी को आवेदन करना होगा तथा उस आवेदन के 90 दिन दिवस के भीतर व्यवसाय की बकाया राशि का समाधान कर दिया।



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फाइल फोटो


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दान में मिली 40 बायपेप मशीन, अस्पतालों ने मरीजों से इन्हीं के वसूल लिए 3 से 5 हजार रुपए

(सुनील सिंह बघेल) जिला प्रशासन को 40 से ज्यादा बायपेप मशीनें दान में मिलीं। प्रशासन ने यह मशीनें निजी अस्पतालों को उपलब्ध करवाईं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन इन मशीनों को कमाई का जरिया बनाकर 3000 से 5000 रोजाना वसूल कर रहे हैं। मशीनों में लगने वाली किट यानी मास्क और पाइप के नाम पर भी दोगुना वसूली की जा रही है। प्रशासन ने कई अस्पतालों को तीन-तीन बायपेप मशीनें उपलब्ध करवाईं, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।

खुद का इंतजाम होने पर चोइथराम जैसे कुछ अस्पतालों ने तो यह मशीनें जिला प्रशासन को वापस कर दीं, लेकिन मयूर, अरिहंत, सुयश, सिनर्जी, विशेष और शैल्बी जैसे अस्पतालों में दान में मिली इन मशीनों के लिए अभी भी व्यावसायिक दरों पर वसूली हो रही है। इनमें से किसी भी अस्पताल में इन मशीनों के लिए किराया 3000 रोजाना से कम नहीं है। ऑक्सीजन के नाम पर रोजाना दो से साढ़े तीन हजार तक अलग से ले रहे।

मशीन किट 1200 की, वसूली 4500 तक
बायपेप मशीन के लिए जरूरी किट की कीमत 1200 रुपए है। बायपेप के लिए जरूरी मास्क की कीमत जीएसटी सहित लगभग 750 रुपए और पाइप लगभग 300 रुपए में आता है, लेकिन अस्पतालों के मेडिकल स्टोर एमआरपी की आड़ में इसे मरीजों को 3000 से ज्यादा में बेच रहे हैं। मरीज बदलने पर ज्यादातर मामलों में सिर्फ मास्क बदला जाता है। इसके लिए 2000 तक लिए जा रहे। सप्लायर से बात करने पर यह भी सामने आया कि अस्पतालों में बायपेप मशीन के मास्क की डिमांड तो है, लेकिन पाइप की नहीं। यानी यह साफ है कि ज्यादातर मामलों में मरीज बदलने पर सिर्फ मास्क बदला जाता है पाइप नहीं। जबकि कीमत पूरी किट की वसूल की जाती है।



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1200 तक की किट के साढ़े 4 हजार रुपए।


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विदेशों में भी असंभव कचरा सेग्रीगेशन, पर हमने कर दिखाया; संभागायुक्त बोले- पांचवीं बार नंबर 1 बनने के लिए इंदौर ने शुरू की तैयारी

सफाई में 5वीं बार नंबर 1 आने के लिए इंदौर नगर निगम ने तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए इस बार भी सबसे अहम रोल सिटीजन फीडबैक का रहेगा। सोमवार को स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 की रीजनल कार्यशाला हुई। इसमें संभागायुक्त डाॅ. पवन कुमार शर्मा ने अपने निगमायुक्त कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया, इंदौर ने कचरा सेग्रीगेशन कर चमत्कार किया है, यह तो विदेशों के लिए भी संभव नहीं था। कार्यशाला में दिल्ली से ऑन लाइन प्रेजेंटेशन भी दिया गया।

संभागायुक्त डाॅ. शर्मा ने कहा, नगरीय निकाय में मेरा लंबे समय का कार्यकाल रहा है। जब मैं निगमायुक्त था, उस समय एशिया के अन्य देशों के साथ-साथ भारत में कचरा सेग्रीगेशन का कार्य असंभव था। किसी भी देश में कचरे का संग्रहण अलग-अलग करने का कार्य बड़ी चुनौती थी। भारत के भी शहरों में यह कार्य चुनौती था, पर जब मैं इंदौर आया तो देखा कि इंदौर ने बहुत ही खूबी के साथ इसे संभव किया है।

गंदगी दिखेगी तो लोग टोक देंगे : कलेक्टर
कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा डोर टू डोर कचरा संग्रहण प्रतिदिन होता है, किसी भी दिन कार्य में लापरवाही होने पर लोग रिएक्ट करते हैं। ऐसे में सभी को सचेत होकर कार्य करना है। वाटर प्लस सर्वे में भी इंदौर को अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए मैदान में उतारकर कार्य करना होगा।

3 आर व 4 आर पर निगम करेगा कार्य
निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने कहा कचरा सेग्रीगेशन, डोर टू डोर कचरा संग्रहण, ड्राय-वेस्ट प्लांट, कचरे का निपटान, 3 आर व 4 आर पर कार्य, बैकलाइन सफाई, रोड स्वीपिंग कार्य, सिटीजन फीडबैक, स्टार रेटिंग, वाटर प्लस सर्वे, सार्वजनिक- सामुदायिक शौचालय व यूरिनल, सर्टिफिकेशन- डॉक्यूमेंटेशन के साथ ही नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार करना आवश्यक है।



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इंदौर नगर निगम (फाइल फोटो)


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खासगी ट्रस्ट में सरकार के 3 प्रतिनिधि, फिर गलत तरीके से संपत्ति कैसे बिक सकती है

खासगी ट्रस्ट की कुछ संपत्तियों के सरकारी दावे के खिलाफ सोमवार को ट्रस्ट व सतीश मल्होत्रा की ओर से हाई कोर्ट में अंतिम बहस पूरी हो गई। पिछली सुनवाई में शासन ने अपने तर्क रखे थे। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि करीब छह दशक पहले ट्रस्ट बना था। इसमें शासन के तीन और इतने ही राजघराने की ओर से सदस्य हैं। ट्रस्ट पर गलत तरीके से संपत्ति बेचने का आरोप लगाया जा रहा है।

जब ट्रस्ट में सरकारी सदस्य हैं तो फिर संपत्ति अवैध तरीके से कैसे बिक सकती है। संपत्ति बेचने की अनापत्ति पर शासन के प्रतिनिधियों के भी हस्ताक्षर हैं। ट्रस्ट व मल्होत्रा की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, श्याम दीवान व अभिनव मल्होत्रा ने पैरवी की। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि पहली बार संपत्ति बेचे जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था तो शासन की ओर से जवाब था कि ट्रस्ट में सरकारी सदस्य मौजूद हैं।

ट्रस्ट को किसी तरह की अनापत्ति सरकार से लेने की जरूरत नहीं है। पिछले वर्षों में कलेक्टर ने बगैर ट्रस्ट का पक्ष सुने 26 राज्यों में ट्रस्ट की सभी 246 संपत्तियों को शासन के अधीन घोषित कर दिया। जबकि राज घराने और सरकार के बीच ही यह तय हुआ था कि जो धार्मिक संपत्तियां हैं, उनकी देखरेख ट्रस्ट के जरिए की जाएगी।

संपत्तियों की देखभाल के लिए बाड़ा बेचा था - ट्रस्ट की ओर से जवाब दिया गया कि 246 संपत्ति का रखरखाव करने सरकार की ओर से महज सवा दो लाख रुपए मिलते हैं। इतने पैसों में संपत्ति की देखरेख नहीं हो सकती। कुशावर्त घाट बेचने का आरोप भी गलत है। घाटा को बेचा ही नहीं गया। यह नैनीताल हाई कोर्ट ने भी माना है। घाट के पास एक बाड़ा था जिस पर अतिक्रमण हो रहा था। उसे बेचा गया है। ट्रस्ट गठन के बाद से अब तक महज छह संपत्ति बेची गई है। जिनकी कुल कीमत भी एक करोड़ रुपए नहीं है। जबकि मल्होत्रा व उषादेवी होल्कर करोड़ों रुपए मंदिर, घाटों के निर्माण और देखरेख के लिए खर्च कर चुके हैं।



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श्रद्धा निधि व सुख निधि की राशि दीपावली के पहले मिलेगी

विद्युत कर्मचारी साख सहकारी संस्था मर्या., रतलाम की 30 वीं वार्षिक साधारण सभा पावर हाउस प्रांगण स्थित श्रम कल्याण केंद्र में अध्यक्ष संजय कुमार वोहरा की अध्यक्षता में हुई। कार्यक्रम के दौरान 2018-19 के अंकेक्षित आय व्यय सचिव नरेश गहलोत, लाभ हानि पत्रक कोषाध्यक्ष श्यामलाल विजयवर्गीय, बैलेंस शीट उपाध्यक्ष अंतिम बाला बिंदल तथा 2020-21 का अनुमानित बजट का वाचन संचालक जमील खान द्वारा कर उपस्थित संस्था सदस्यों से स्वीकृति प्राप्त की। 2018-19 का ऑडिट नोट संस्था अध्यक्ष संजय कुमार वोहरा द्वारा सदस्यों के सम्मुख प्रस्तुत कर ध्वनि मत से पारित कर संस्था के शुद्ध लाभ 15,77,751.46 पर शेयर के 14 फीसदी लाभांश की घोषणा की।

साथ ही घोषणा की कि संस्था द्वारा परिवार सुख निधि तथा श्रद्धा निधि की राशि का भुगतान दीपावली के पूर्व सदस्यों को किया जाएगा। अध्यक्ष ने बताया कि संचालक मंडल तथा संस्था सदस्यों पर कालातीत ऋण निरंक है। फेडरेशन के क्षेत्रीय सचिव तथा संस्था के पूर्व अध्यक्ष सूर्यकांत उपाध्याय, एसपी पाराशर, पूर्व संचालक तथा वृत फेडरेशन के अध्यक्ष केके दुबे विशेष रूप से उपस्थित थे। आभार संचालक चेतन माल ने व्यक्त किया। राष्ट्रगान एवं दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि के साथ सभा का समापन हुआ।



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साधारण सभा को संबोधित करती महिला सदस्य।


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